Meaning & Translation
✨Spiritual Benefits
📜About this Aarti
Frequently Asked Questions
एकादशी व्रत का पारण (व्रत खोलना) कब किया जाता है?
एकादशी का व्रत हमेशा अगले दिन 'द्वादशी तिथि' (12वें दिन) के सूर्योदय के बाद और हरि वासर (द्वादशी का पहला एक-चौथाई हिस्सा) समाप्त होने के बाद ही खोला (पारण किया) जाता है। एकादशी की पूजा में इस "ॐ जय एकादशी माता" आरती का गायन अनिवार्य माना जाता है।
इस आरती में 'परमा' और 'पद्मिनी' एकादशी का उल्लेख अंत में क्यों किया गया है?
'परमा' और 'पद्मिनी' एकादशी नियमित 12 महीनों में नहीं आतीं। ये दोनों एकादशियां 'अधिक मास' (मलमास या पुरुषोत्तम मास) में आती हैं, जो हिन्दू पंचांग में हर 3 साल में एक बार जुड़ता है। इसलिए वर्ष की 24 नियमित एकादशियों के बाद, इन 2 विशेष एकादशियों (कुल 26) का उल्लेख किया गया है।
सनातन धर्म में एकादशी व्रत का इतना अधिक महत्व क्यों है?
एकादशी को 'व्रतराज' (सभी व्रतों का राजा) कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी स्वयं भगवान विष्णु की ही शक्ति (माता एकादशी) का स्वरूप है, जो पापों का नाश करने के लिए प्रकट हुई थीं। इस दिन व्रत रखने और भगवान विष्णु की पूजा करने से मनुष्य के सभी जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे अंततः मोक्ष की प्राप्ति होती है।