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श्रावण मास का माहात्म्य और पौराणिक कथा

Dedicated to Lord Shiva and Goddess Parvati.

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1
द्वादशस्वपि मासेषु श्रावणो मेऽतिवल्लभः ।
2
श्रवणार्हं यन्माहात्म्यं तेनासौ श्रवणो मत: ॥
3
श्रवणर्क्षं पौर्णमास्यां ततोऽपि श्रावण: स्मृतः।
4
यस्य श्रवणमात्रेण सिद्धिद: श्रावणोऽप्यतः ॥

Meaning & Translation

Verse 1
Among all twelve months, Shravan is exceedingly dear to me.
Verse 2
Its greatness is worthy of being heard, hence it is called Shravan.
Verse 3
The full moon (Purnima) in this month is associated with the Shravan Nakshatra, therefore it is also remembered as Shravan.
Verse 4
Merely by hearing its greatness, it bestows accomplishments (siddhi), hence it is also known as Shravan.

Spiritual Benefits

श्रावण मास में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से वैवाहिक जीवन सुखमय होता है, वहीं अविवाहित लड़कियों को मनचाहे वर की प्राप्ति होती है। समर्पण के साथ भगवान शिव की पूजा करने से वे भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं।

📜About this Chalisa

श्रावण मास हिंदू पंचांग का पाँचवा मास है, जो भगवान शिव की पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस माह में वर्षा ऋतु होती है और यह शिव-पार्वती की विशेष कृपा प्राप्त करने का समय है। पौराणिक कथा के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान निकले हलाहल विष को भगवान शिव ने पीकर सृष्टि की रक्षा की थी, जिससे वे नीलकंठ कहलाए। यह घटना श्रावण मास में हुई थी, इसलिए इस पूरे माह शिव-पार्वती की विशेष पूजा की जाती है। सावन सोमवार व्रत का विशेष महत्व है, जिससे वैवाहिक सुख और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। यह प्रामाणिक जानकारी shyamstuti.in द्वारा प्रस्तुत की गई है।

Frequently Asked Questions

श्रावण मास का क्या आध्यात्मिक महत्व है?

श्रावण मास भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। इस माह में शिवजी की पूजा करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। यह मास श्रवण नक्षत्र और शिव के माहात्म्य के श्रवण से जुड़ा है, जो सिद्धि प्रदान करता है।

समुद्र मंथन की पौराणिक कथा श्रावण मास से कैसे संबंधित है?

पौराणिक कथा के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान हलाहल विष निकला था, जिसे भगवान शिव ने लोक कल्याण हेतु पी लिया था। इस घटना के कारण उनका कंठ नीला पड़ गया और वे 'नीलकंठ' कहलाए। यह घटना श्रावण मास में हुई थी, इसलिए यह मास शिव-पार्वती की पूजा के लिए विशेष माना जाता है।

श्रावण मास में शिव पूजा का क्या लाभ है?

श्रावण मास में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से वैवाहिक जीवन सुखमय होता है। अविवाहित कन्याओं को मनचाहा वर प्राप्त होता है। समर्पण भाव से की गई पूजा से भगवान शिव भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं।

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